DA Hike 2025: देश के करोड़ों केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता यानी डीए से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच सरकार द्वारा समय-समय पर डीए बढ़ाया जाता रहा है और अब यह 50 प्रतिशत के अहम स्तर तक पहुंच चुका है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि वेतन व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत माना जाता है। पिछले वेतन आयोगों की परंपरा के अनुसार जब भी डीए इस स्तर तक पहुंचता है, तो इसे मूल वेतन में शामिल करने की मांग तेज हो जाती है। दिसंबर 2025 तक डीए का 50% होना कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों की तेज होती मांग
डीए के 50 प्रतिशत पर पहुंचते ही कर्मचारी संगठन और यूनियनें इसे बेसिक वेतन में मर्ज करने की मांग जोर-शोर से उठा रही हैं। उनका मानना है कि इससे वेतन और पेंशन में स्थायी बढ़ोतरी होगी। हालांकि 8वें वेतन आयोग के गठन के बावजूद कर्मचारी संगठनों में असंतोष बना हुआ है, क्योंकि उनकी कई पुरानी और जरूरी मांगों पर अब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया है। इसी वजह से दिसंबर 2025 तक कर्मचारी संगठन ज्ञापन, बैठक और विरोध के जरिए अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं।
डीए मर्ज होने पर सैलरी कैसे बढ़ेगी
महंगाई भत्ता कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनाए रखने के लिए दिया जाता है। यदि सरकार 50 प्रतिशत डीए को मूल वेतन में जोड़ने का फैसला लेती है, तो इसका सीधा असर बेसिक सैलरी पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी का मौजूदा बेसिक वेतन ₹20,000 है, तो डीए मर्ज होने के बाद यह बढ़कर ₹30,000 हो जाएगा। यह बढ़ोतरी सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी और उनकी कुल आय में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा।
अन्य भत्तों और पेंशन पर असर
बेसिक वेतन बढ़ने का फायदा सिर्फ सैलरी तक सीमित नहीं रहता। अधिकतर भत्ते जैसे एचआरए, टीए और अन्य अलाउंस बेसिक वेतन के आधार पर तय होते हैं। इसलिए बेसिक बढ़ते ही इन सभी भत्तों में भी अपने आप इजाफा हो जाता है। पेंशनर्स के लिए भी यह फैसला फायदेमंद रहेगा, क्योंकि उनकी बेसिक पेंशन बढ़ेगी और भविष्य की गणना भी ऊंचे आधार पर होगी। अनुमान है कि इससे करीब 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा लाभ मिल सकता है।
8वें वेतन आयोग को लेकर नाराजगी क्यों
केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी जरूर दे दी है, लेकिन इसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस को लेकर कर्मचारी संगठन संतुष्ट नहीं हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग है कि डीए मर्जर पर तुरंत फैसला लिया जाए और 1 जनवरी 2026 से नया वेतन आयोग लागू किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका डीए अब बिना देरी के बेसिक वेतन में जोड़ा जाना चाहिए।
कर्मचारियों की अन्य प्रमुख मांगें
डीए मर्जर के अलावा कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही कोरोना काल में रोकी गई 18 महीने की डीए किस्तों के भुगतान की मांग भी जोर पकड़ रही है। एक और अहम मांग पेंशन की कम्यूटेड राशि की बहाली से जुड़ी है, जिसमें वर्तमान 15 साल की अवधि को घटाकर 11 साल करने की बात कही जा रही है। दिसंबर 2025 तक ये सभी मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं।
कब तक लागू हो सकते हैं बदलाव
8वें वेतन आयोग से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनर्स प्रभावित होंगे। हालांकि आयोग की सिफारिशें तैयार होने और उन्हें लागू होने में समय लगता है। पिछले अनुभवों के आधार पर माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2027 के मध्य या 2028 की शुरुआत तक लागू हो सकती हैं। डीए का 50 प्रतिशत तक पहुंचना कर्मचारियों के लिए एक बड़ा पड़ाव है और इसे बेसिक वेतन में शामिल करने की मांग को पूरी तरह तार्किक माना जा रहा है।