8th Pay Commission Pension: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर लगातार चर्चाएं तेज हैं। सरकार ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी कर आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है, लेकिन पेंशन में बदलाव और महंगाई भत्ते को बेसिक वेतन में जोड़ने जैसे अहम विषयों पर अभी स्थिति साफ नहीं हो पाई है। इन मुद्दों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
वेतन आयोग की पुरानी परंपरा
भारत में सरकारी कर्मचारियों के वेतन निर्धारण के लिए वेतन आयोग की व्यवस्था आजादी से पहले शुरू हो चुकी थी। पहला वेतन आयोग 1946 में बना था और इसके बाद लगभग हर दस साल में नया आयोग गठित किया गया। 7वां वेतन आयोग वर्ष 2016 में लागू हुआ था, जिससे कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा हुआ और न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये तक पहुंच गया। अब 8वें वेतन आयोग के लिए नवंबर 2025 में टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किए गए हैं और अध्यक्ष की नियुक्ति भी हो चुकी है। जानकारों का मानना है कि इस बार वेतन में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है।
फिटमेंट फैक्टर से कितनी बढ़ सकती है सैलरी
अगर नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3 या उससे अधिक तय किया जाता है, तो न्यूनतम बेसिक वेतन 25 हजार से 30 हजार रुपये तक जा सकता है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत होगी। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में करीब 12 से 18 महीने का समय दिया गया है, ऐसे में नया वेतन ढांचा 2027 तक लागू होने की संभावना जताई जा रही है।
पेंशनर्स को क्यों है सबसे ज्यादा चिंता
पेंशनभोगियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 8वें वेतन आयोग में पेंशन संशोधन को शामिल किया जाएगा या नहीं। जारी किए गए टर्म्स ऑफ रेफरेंस में पेंशन को लेकर स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिस वजह से पेंशनर्स असमंजस में हैं। पेंशन संगठनों की मांग है कि महंगाई भत्ता और महंगाई राहत को बेसिक पेंशन में जोड़ा जाए, ताकि उन्हें तुरंत फायदा मिल सके।
डीए और डीआर मर्ज होने से क्या होगा फायदा
फिलहाल महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुका है। अगर इसे बेसिक वेतन या बेसिक पेंशन में मिला दिया जाता है, तो पेंशन में सीधे 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। बढ़ती महंगाई के दौर में यह पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत साबित होगी। इसी मुद्दे को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में कई सवाल उठाए गए हैं।
राज्यसभा में उठे अहम सवाल
सांसदों ने सरकार से तीन अहम जानकारियां मांगी हैं, जिनमें 8वें वेतन आयोग के गठन और उसके दायरे की पूरी जानकारी, डीए और डीआर को बेसिक में मिलाने की योजना और पेंशन संशोधन को आयोग में शामिल करने से जुड़ा सवाल शामिल है। इन सवालों के जवाब से यह साफ होगा कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स को लेकर क्या रणनीति अपना रही है।
कर्मचारी संगठनों की उम्मीदें
कर्मचारी यूनियन और पेंशनर्स संगठन लंबे समय से डीए और डीआर के विलय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यह फैसला लिया जाता है, तो कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को तुरंत राहत मिलेगी। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संगठनों को उम्मीद है कि जल्द सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।
आगे क्या हो सकती है स्थिति
अगर सरकार पेंशन संशोधन को 8वें वेतन आयोग के दायरे में शामिल करती है, तो यह पेंशनर्स के लिए बड़ा फायदा साबित होगा। बेसिक पेंशन बढ़ने से भविष्य की पेंशन गणना भी ज्यादा आधार पर होगी। फिलहाल सभी की नजरें सरकार के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों और पेंशनर्स को कितना लाभ मिलेगा।
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